गाँव में सेठ जगन्नाथ जमींदार का बड़ा रुतबा था। सारा इलाका उन्हें सलाम करता, उनकी हवेली पूरे गाँव में किसी राजमहल से कम न थी।

Updated on:

सजे हुए थाल मेरे सामने रखे गए।
गरमा-गरम पूरियाँ, कचौड़ियाँ, मसालेदार सब्ज़ियाँ, पाँच-पाँच तरह की दालें, पुलाव, बिरयानी, दर्जनों मिठाइयाँ, साथ में पापड़ और सलाद।
चार-चार नौकर सेवा में खड़े थे।
मैं हैरान होकर सोच रहा था—“वाह रे भाग्य! मेरे जैसे साधारण आदमी को ये राजसी दावत।”

इतने में सेठ जगन्नाथ खुद अंदर आए।
गठीला शरीर, लेकिन चेहरा थका-थका, आँखों के नीचे काले घेरे।
मैंने आदर से नमस्ते किया।
उनके सामने भी थाली सजाई गई, पर उसमें बस दो सूखी चपातियाँ और हल्की सी उबली हुई सब्ज़ी रखी गई।

मैं चौंक उठा।
“सेठजी, ये क्या? आपके सामने इतना भव्य भोज और आपकी थाली में इतनी साधारण चीज़ें?”

सेठजी हल्का मुस्कुराए और बोले,
“डॉक्टर ने कह दिया है—तेल-मसाला सब छोड़ो। मिठाई मत छुओ, घी मत खाओ।
वरना दिल की नसें बंद हो जाएँगी।
शुगर लेवल तो पहले ही बढ़ा हुआ है।”

मैं अवाक रह गया।
इतने में उनका बड़ा मैनेजर अंदर आया और धीरे से बोला,
“सेठजी, कल सुबह शहर में नया प्लॉट खरीदने का सौदा है।
रात में मिल से लेन-देन देखना है।
और अगले हफ़्ते विदेश से मशीनें आ रही हैं, उनका इंतज़ाम भी करना है।”

सेठजी ने थकी आवाज़ में कहा,
“हाँ-हाँ, सब देख लेंगे।
पैसा कमाने का काम रुकना नहीं चाहिए।”

मैंने हिम्मत करके पूछ लिया,
“सेठजी, आप इतना धन किसलिए जोड़ रहे हैं? आखिरकार इतना पैसा कहाँ खर्च होगा?”

Ankit Verma

अंकित वर्मा एक रचनात्मक और जिज्ञासु कंटेंट क्रिएटर हैं। पिछले 3 वर्षों से वे डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं और Tophub.in पर बतौर लेखक अपनी खास पहचान बना चुके हैं। लाइफस्टाइल, टेक और एंटरटेनमेंट जैसे विषयों में विशेष रुचि रखते हैं।

Latest Stories

Leave a Comment