माँ की आवाज़ में बेचैनी साफ झलक रही थी। फ़ोन के उस पार रवि चुपचाप सुन रहा था। दुबई में रहते-रहते तीन साल हो गए थे, लेकिन माँ का ये वाक्य मानो हर महीने दो-तीन बार सुनने को मिल ही जाता। माँ अकेली नहीं थी घर में, लेकिन सच ये भी था कि घर में रहते हुए भी वो अकेली पड़ चुकी थी।
रवि की पत्नी सीमा अपने मायके में थी। शादी को डेढ़ साल ही हुआ था, पर दोनों साथ ज़्यादा वक्त बिता नहीं पाए। रवि जब दुबई चला गया तो सीमा ने सोचा था कि वो भी जल्द ही पति के पास चली जाएगी। पर रवि का कहना था कि “अभी हालात ठीक नहीं हैं, वीज़ा लगने में टाइम लगेगा। फिलहाल यहीं रहो।”
घर में रवि की भाभी काजल और माँ ही थीं। बड़ा भाई अरुण, जो पहले ही सेठ की फैक्ट्री में काम करता था, वही दुबई भेजने का इंतज़ाम किया था। अरुण का कहना था कि विदेश जाकर पैसे कमाने से ही घर की हालत सुधरेगी। लेकिन पैसे कमाने की इस दौड़ में कहीं न कहीं घर के रिश्ते बिखरने लगे थे।
माँ की बेचैनी
माँ का मन बहुत संवेदनशील था। वो दिन भर मंदिर, पूजा-पाठ और मोहल्ले की औरतों के बीच समय काट लेती थीं, लेकिन शाम होते ही अकेलापन घेर लेता। वो अक्सर सीमा से कहतीं, “बेटी, आदमी चाहे जितना पैसा कमा ले, अगर घर में चैन और साथ नहीं तो सब बेकार है। देखना, मैं एक दिन रवि को बुला ही लूँगी।”
सीमा चुप रह जाती। उसका मन भी यही चाहता था कि पति साथ रहे, पर वो जानती थी कि अरुण और काजल का इस घर पर ज़्यादा दबदबा है। अगर वो कुछ कहेगी तो बात बिगड़ जाएगी।
धीरे-धीरे बदलता माहौल
काजल, यानी भाभी, का रवैया अजीब था। बाहर से देखो तो घर की जिम्मेदारी उठाने वाली औरत, लेकिन भीतर ही भीतर उसका रवैया बिल्कुल अलग था। वो अक्सर सीमा को ताना देती, “तेरे पति तो विदेश में मौज कर रहे हैं और तू यहाँ सास की सेवा में लगी है। देख लेना, ऐसे में औरत का जीवन बरबाद हो जाता है।”
सीमा को ये ताने चुभते थे, लेकिन वो हर बार खुद को समझा लेती कि पति के लिए, घर के लिए सब सहना पड़ेगा। पर उसके भीतर धीरे-धीरे शक और बेचैनी जगह बनाने लगी।
सच्चाई की आहट
एक दिन माँ मंदिर से लौटीं तो आँगन में हल्की-हल्की हँसी की आवाज़ सुनी। जब अंदर गईं तो देखा कि काजल और मोहल्ले का एक नौजवान संदीप हँसते-बतियाते बैठे हैं। माँ ने आते ही दोनों को चौकन्ना कर दिया। संदीप तुरंत उठकर चला गया।
माँ को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने उसी शाम सीमा से कहा, “बेटी, घर में जो दिख रहा है वो सही नहीं लग रहा। तू ध्यान रखना, काजल का रवैया ठीक नहीं है।”
सीमा सन्न रह गई। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि भाभी इस तरह के रिश्तों में उलझ सकती है। लेकिन अगले कुछ दिनों में उसने खुद भी महसूस किया कि भाभी अक्सर संदीप से मिलने के बहाने ढूँढती है।