Part 2 – अतीत की परतें

उस तस्वीर ने मेरी रूह तक को हिला दिया था।
मैंने तीन साल तक अर्जुन के साथ बिताए थे – हर पल में उसकी ईमानदारी, उसका आत्मविश्वास और उसका प्यार ही देखा था। और अब एक तस्वीर ने सबकुछ तोड़कर रख दिया।
उस रात मैंने अर्जुन से सीधे पूछा:
“क्या तुम मुझे कुछ छिपा रहे हो? ये तस्वीर सच है?”
वह ज़रा रुका, फिर हँसते हुए बोला:
“ये कैसी बकवास है? तुम दुल्हन बनने वाली हो, और ये सब वहम पाल रही हो? देखो, ये सब किसी की चाल है।”
उसने मुझे गले लगाया, लेकिन उसका आलिंगन अचानक बोझिल लग रहा था। उसकी बाँहों में अब मुझे सुरक्षा नहीं, बल्कि एक घुटन महसूस हुई।
कुछ ही दिनों बाद मैंने रवि से मिलने का निश्चय किया।
हम मरीन ड्राइव के किनारे एक छोटे कैफ़े में बैठे थे। लहरों की आवाज़ और हल्की-सी हवा के बीच, उसकी आँखों में अब भी वही बेचैनी थी।
मैंने धीरे से पूछा:
“उस दिन तुमने मुझे ‘भागने’ को क्यों कहा था? वो तस्वीर क्यों भेजी?”
उसकी साँस भारी हो गई। वह कुछ क्षण चुप रहा, फिर धीमी आवाज़ में बोला:
“क्योंकि अर्जुन वही है जिसने मेरी बहन की ज़िंदगी बर्बाद की।”
मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।
“क…क्या?”
रवि की आँखें भर आईं, लेकिन उसकी आवाज़ दृढ़ थी:
“एक साल पहले, मेरी बहन और अर्जुन के बीच रिश्ता था। वह उससे बेहद प्यार करती थी। अर्जुन ने वादा किया था कि वह उससे शादी करेगा। उसने उसके साथ एक पूरा भविष्य देखा था। लेकिन सब झूठ था। जब मेरी बहन गर्भवती हुई… उसने उसे तुरंत छोड़ दिया। वह टूट गई… और हमने उसे हमेशा के लिए खो दिया।”
मेरे भीतर का पूरा संसार बिखर गया।
मैं कुर्सी से चिपक गई, आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
रवि ने धीरे से मेरा हाथ थामा। उसकी आँखों में कोई छल नहीं था, सिर्फ़ सच्चाई और दर्द था।
“मैं किसी और लड़की को वही गलती नहीं करने देना चाहता। फोटोशूट के दिन जब मैंने तुम्हें देखा, तो मुझे अपनी बहन की मासूम आँखें याद आ गईं। मैं चुप नहीं रह सकता था।”
उस रात मैं घर लौटी और सीधे अर्जुन के सामने तस्वीर रख दी।
“समझाओ। ये क्या है?”
उसने तस्वीर पर नज़र डाली, उसका चेहरा पल भर को सख़्त हो गया। फिर उसने ठंडी हँसी हँसी:
“अरे, यह वही फोटोग्राफर है न? वह मुझसे नफ़रत करता है, इसलिए तुम्हें बेवकूफ़ बना रहा है। मत फँसो इसमें। यह हमारी शादी खराब करना चाहता है।”
लेकिन इस बार उसकी आँखों ने सब कह दिया।
उन आँखों में सच्चाई नहीं थी, सिर्फ़ झूठ और ठंडापन था।
मैंने गहरी साँस लेकर कहा:
“तुम्हारे शब्द चाहे जो हों, लेकिन मेरा भरोसा अब टूट चुका है। यह शादी यहीं ख़त्म है।”
अर्जुन गुस्से से कांपने लगा। उसकी आवाज़ ऊँची हो गई।
लेकिन मैं पलटे बिना कमरे से बाहर निकल गई।
उस रात से मेरी ज़िंदगी बदल गई।
मैं टूटी हुई थी, लेकिन भीतर से हल्की भी। मुझे पता था कि झूठे रिश्ते को ढोने से बेहतर है सच के साथ दर्द झेलना।
और मेरे भीतर कहीं एक धन्यवाद भी था – उस अजनबी फोटोग्राफर का, जिसने अपनी बहन की मौत के बाद भी हिम्मत दिखाई और सच कहने का साहस किया।