रेलवे कॉलोनी, जबलपुर की सर्द सुबह हमेशा की तरह धुंध से ढकी हुई थी। यहां रहने वाले लोग रोज़ाना की भागदौड़ में खोए रहते, पर मोहनलाल का परिवार उस भीड़ से थोड़ा अलग था। मोहनलाल रेलवे विभाग में काम करता था और ईमानदारी से अपनी नौकरी निभाने वाला व्यक्ति था। उसकी पत्नी चंचला देवी घर की देखभाल करती थीं। उनके दो बच्चे थे बेटी आराध्या और बेटा कनिष्क। देखने में उनका परिवार आम था, पर मोहनलाल के सपनों में बहुत गहराई थी। वह चाहता था कि उसके दोनों बच्चे पढ़-लिखकर बड़ी नौकरियाँ पाएँ और समाज में नाम कमाएँ।
मोहनलाल ने अपनी हर इच्छा का गला घोंट दिया था ताकि बच्चों की ज़रूरतें पूरी हों। चाहे कपड़े खरीदने की बात हो या पढ़ाई के लिए कोचिंग की फीस, उसने कभी उन्हें कमी महसूस नहीं होने दी। परिवार के चारों पहियों पर गाड़ी सही चल रही थी। मगर किस्मत ने एक दिन ऐसा खेल खेला कि पूरा जीवन उलझ गया।
कुछ महीनों पहले मोहनलाल अपने परिवार को लेकर कश्मीर घुमाने गया। सफर के दौरान चंचला देवी अचानक बीमार पड़ गईं। शुरू में लगा मामूली कमजोरी है, पर हालत बिगड़ने लगी। उन्हें तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिवार बेचैन था और इलाज के बीच ही अचानक खबर आई—दिल का दौरा पड़ने से चंचला देवी की मौत हो गई।
यह खबर सुनते ही मानो आकाश टूटकर परिवार पर गिर पड़ा। मोहनलाल के लिए यह सिर्फ पत्नी की मौत नहीं थी, बल्कि घर की आत्मा के खो जाने जैसा था। बच्चे रो-रोकर बेहाल थे। घर लौटने के बाद सन्नाटा और मातम उनके चारों ओर छा गया।
मोहनलाल ने सोचा कि बच्चों को कुछ समय के लिए गाँव भेज दे। उसके पैतृक गाँव में दादा-दादी, चाचा-चाची और उनके बच्चे रहते थे। उसने सोचा कि वहां रहकर बच्चे थोड़ी चहल-पहल में माँ को भूल पाएँगे। कुछ दिनों तक बच्चों ने गाँव में समय बिताया और धीरे-धीरे माहौल हल्का होने लगा।
फिर समय आया जब आराध्या की दसवीं की परीक्षा नज़दीक थी। मोहनलाल बच्चों को लेकर वापस जबलपुर लौटा। कनिष्क वापस गाँव में ही रहना चाहता था, पर मोहनलाल ने कहा—“परीक्षा खत्म हो जाए तो फिर सब मिलकर वहीं रहेंगे।”
लेकिन उस वापसी ने ही उनके जीवन को ऐसा मोड़ दिया जिसे सुनकर हर कोई सिहर उठे।
अगली सुबह, कॉलोनी में मोहनलाल का दोस्त उनके घर पहुंचा। दरवाजा खटखटाने पर ताला बंद मिला। उसे अजीब लगा। आस-पड़ोस वालों से पूछा तो उन्होंने कहा कि कल रात से किसी ने मोहनलाल को नहीं देखा, न ही वह ड्यूटी गया। दोस्त ने दफ़्तर फोन किया, मगर वहां भी उसकी गैरहाज़िरी दर्ज थी।