क्लाइमेक्स की लड़ाई ऐसी थी, जैसी किसी ने पहले नहीं देखी। रेत का तूफ़ान उठा हुआ था, आसमान लाल था और जमीन पर लाशें बिखरी थीं। अर्जुन अकेला राणा की ओर बढ़ा। गोलियों से बचता, खून से लथपथ, लेकिन उसके चेहरे पर डर नहीं था। राणा ने हँसते हुए कहा – “तेरी औक़ात सिर्फ मजदूर बनने की थी। राजा बनने का सपना देखने वाला कुत्ता है तू।”
अर्जुन ने अपनी तलवार उठाई और गरजकर बोला – “औक़ात हमें कोई नहीं देता राणा, हम खुद बनाते हैं। तूने गरीबों का खून चूसा है, अब उसी खून से तेरी कब्र बनेगी।”
दोनों के बीच ऐसी लड़ाई हुई कि रेत भी काँप उठी। अर्जुन ने हर वार के साथ अपनी बीवी की चीखें और मजदूरों का दर्द महसूस किया। आखिरकार उसने राणा को जमीन पर घसीटा और उसकी गर्दन पकड़कर कहा – “राज़ वो नहीं करता जो डराए, राज़ वो करता है जिस पर लोग भरोसा करें।” और एक ही वार में उसने राणा का सिर धड़ से अलग कर दिया।
लड़ाई खत्म हुई, लेकिन जंगल अब भी खून से भीगा था। गाँववालों ने अर्जुन को भगवान की तरह पूजा। लोग उसके पाँव छूकर रोने लगे। लेकिन अर्जुन ने सिंहासन पर बैठते ही कहा – “भगवान मत बनाओ। मैं तुममें से हूँ। फर्क बस इतना है कि मैंने डर से लड़ाई की और तुमने डर में जीना सीखा। अब से ये जंगल मेरा नहीं, हमारा है।”
माया धीरे-धीरे ठीक हो गई। बेटा बाप की गोद में खेलता रहा। अर्जुन ने उसे ऊपर उठाकर कहा – “ये जंगल अब तेरा होगा बेटा, लेकिन खून से नहीं, हक़ से। तू राज करेगा, लेकिन तलवार से नहीं, भरोसे से।”
कैमरा ज़ूम आउट होता है, सूरज की आग जैसी रोशनी पूरे जंगल पर गिरती है और अर्जुन का चेहरा चमकता है। स्क्रीन पर आखिरी लाइन उभरती है – “अग्नि का बादशाह – ये कहानी यहाँ खत्म नहीं होती।”