अंजलि सिर्फ़ 20 साल की थी। यूनिवर्सिटी के दूसरे साल की छात्रा। किताबों और सपनों में डूबी एक आम लड़की। लेकिन अचानक उसकी ज़िंदगी पर बिजली गिर गई।
उसके पिता पर ज़मीन के एक झगड़े का मुक़दमा चला, और गिरफ़्तारी हो गई। कोर्ट ने साफ़ कहा – “₹20 लाख दो, वरना जेल जाओ।” माँ के आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। घर में न पैसा था, न कोई सहारा। अंजलि के सामने माँ और पिता का टूटता हुआ चेहरा था, और उसके दिल पर बोझ बढ़ता जा रहा था।
इसी बीच, एक परिचित ने “रास्ता” सुझाया। एक नाम लिया गया – श्री शर्मा। उम्र 70 साल। तीन पत्नियों के बाद अकेले, लेकिन अपार दौलत के मालिक। उनकी शर्त साफ़ थी – “मैं तुम्हारे पिता को छुड़वा दूँगा। 20 लाख दूँगा। लेकिन बदले में, अंजलि मेरी पत्नी बनेगी। प्यार की ज़रूरत नहीं, बस एक नाम चाहिए।”
अंजलि को लगा जैसे ज़मीन खिसक गई हो। वो अभी पढ़ाई कर रही थी, उसकी ज़िंदगी शुरू ही हुई थी… और शादी? वो भी 70 साल के बुज़ुर्ग से? लेकिन माँ का रोना, पिता की थकी हुई आँखें, और परिवार की मजबूरी… उसे मजबूर कर गईं। काँपते हाथों से उसने हाँ कह दिया।