वह चुप रही, फिर हल्के से “जी” कहकर नजरें दूसरी तरफ फेर लीं। आधा घंटा बीत गया, बस का नामोनिशान नहीं।

Published on:

Romantic Story : की चिलचिलाती दोपहर थी। पसीना माथे से टपक रहा था और मैं जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाता हुआ बस स्टॉप पर पहुँचा। पहली ही बार इस छोटे कस्बे में बस पकड़नी थी, क्योंकि मेरा स्कूटर अचानक बीच रास्ते में धोखा दे गया था। जेब से रूमाल निकाला और गर्दन के पीछे बहता पसीना पोंछते हुए बेंच पर बैठ गया। नजरें बार-बार ऊपर लगी बस संख्या की पट्टियों पर जातीं 26, 212, 50… मगर कौन सी बस मुझे ऑफिस तक पहुँचाएगी, इसकी बिल्कुल जानकारी नहीं थी।

तभी अचानक पास खड़ी एक महिला नज़र आई। पीली प्रिंटेड साड़ी, स्लीवलेस ब्लाउज़ और आँखों पर काला चश्मा… उसकी मौजूदगी में जैसे बस स्टॉप की सारी भीड़ एकदम गायब हो गई हो। हिम्मत जुटाकर मैंने उससे पूछा –
“मैडम, सेक्टर 40 जाने के लिए कौन सी बस मिलेगी?”

उसने बस एक शब्द में जवाब दिया “827।”

उसकी आवाज़ में संक्षिप्तता थी, मगर एक अजीब-सा आकर्षण भी।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा –
“क्या आप भी उसी तरफ जा रही हैं?”

वह चुप रही, फिर हल्के से “जी” कहकर नजरें दूसरी तरफ फेर लीं। आधा घंटा बीत गया, बस का नामोनिशान नहीं। मैं बेचैन था, देर से ऑफिस पहुँचना मेरी आदत नहीं थी। तभी मैंने मजाक में कहा –
“लगता है आज यहाँ से बसें चलना भूल गई हैं।”

उसकी हल्की-सी मुस्कान पहली बार देखी और मैं भीतर तक हिल गया। अचानक वही बस आ गई जिसका इंतजार था और मेरी उस अनजान महिला से पहली मुलाकात वहीं समाप्त हो गई।

Ankit Verma

अंकित वर्मा एक रचनात्मक और जिज्ञासु कंटेंट क्रिएटर हैं। पिछले 3 वर्षों से वे डिजिटल मीडिया से जुड़े हैं और Tophub.in पर बतौर लेखक अपनी खास पहचान बना चुके हैं। लाइफस्टाइल, टेक और एंटरटेनमेंट जैसे विषयों में विशेष रुचि रखते हैं।

Latest Stories

Leave a Comment