पार्क की चुगली
उस शाम पार्क में बाकी महिलाएँ – रिनी, भावना, ऋतिका – सब इकट्ठा हुईं। बातों-बातों में वही नया परिवार चर्चा का विषय बन गया।
जाहन्वी ने उसी अंदाज़ में कहा –
“देखना, कोई छोटे-मोटे लोग होंगे। कपड़े देखे हैं इनके? लड़की भी बस साधारण सलवार में घूमती है, कोई स्टाइल ही नहीं।”
रिनी ने हँसते हुए कहा –
“जाहन्वी, तुझे तो हर किसी में कमी निकालने की आदत है।”
पर जाहन्वी अपने तेवर में बोली –
“अरे, जो जैसा है वही कहूँगी न।”
किटी पार्टी की तैयारी
इन औरतों की हर महीने एक किटी पार्टी होती थी। बारह मेंबर थे, पर नीता हाल ही में अपने पति के साथ ट्रांसफर होकर दूसरे शहर चली गई थी। अब एक नई मेंबर की तलाश थी।
रिनी ने सुझाव दिया –
“क्यों न नए आने वाले परिवार की महिला को बुलाएँ? संख्या भी पूरी हो जाएगी।”
पर जाहन्वी ने तुरंत मुँह बिचकाया –
“ना बाबा, मुझे तो उससे बात भी नहीं करनी।”
“क्यों?” भावना ने पूछा।
“क्योंकि वो गंवार लगती है। ऐसे लोगों को किटी में लाना हमारी शान कम कर देगा।”
नया राज़ खुलने वाला था
कुछ दिनों तक वो महिला और उसकी बेटी सोसायटी में दिखती रहीं। बहुत साधारण कपड़े, शांत स्वभाव, किसी से खास बात नहीं।
लोगों ने मान लिया कि जाहन्वी शायद सही कह रही थी।
लेकिन असली सच्चाई किसी को नहीं पता थी…
और ये सच्चाई शनिवार को सबके होश उड़ा देने वाली थी।