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मैं आपकी बेटी की क्लास टीचर रेखा मेम बोल रही हूँ। आज दूसरी क्लास की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग है। कृपया अपनी बेटी के साथ समय पर पहुँचिएगा।

सुबह-सुबह जब अजय ऑफिस में अपनी फाइलें टेबल पर रख ही रहा था, तभी फोन की घंटी बजी। उसने रिसीवर उठाया तो दूसरी तरफ से एक ठंडी लेकिन सख्त आवाज़ आई “नमस्ते! मैं आपकी बेटी की क्लास टीचर रेखा मेम बोल रही हूँ। आज दूसरी क्लास की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग है। ...

लेकिन हवेली में रहते हुए नीलिमा को महसूस हुआ, यहाँ कुछ तो अजीब है। घर के लोग दिखते तो थे, पर उनकी आँखों में जैसे कोई गहरा राज़ छुपा था

रात के साढ़े बारह बजे थे। पुरानी हवेली की खिड़कियों से आती हवा डरावनी आवाज़ कर रही थी। नीलिमा पहली बार अपने ससुराल की इस हवेली में आई थी। शादी को सिर्फ़ पाँच दिन हुए थे। बाहर से देखने में हवेली शाही लगती थी, लेकिन भीतर अजीब-सी वीरानी थी। नीलिमा ...

गाँव के किनारे रहता था शंकर। एक सीधा-सादा किसान। उसकी ज़िंदगी खेत, बैल और छोटी-सी बेटी गौरी के इर्द-गिर्द घूमती थी

गाँव नरहरपुर में हर गली, हर चौपाल पर एक ही बात कही जाती थी—“रात में पुराने कुएँ के पास मत जाना।” गाँव की औरतें अपने बच्चों को डराने के लिए कहतीं—“अगर शरारत की तो कुएँ वाली चुड़ैल पकड़ ले जाएगी।” बच्चे डर जाते, लेकिन बड़े-बुज़ुर्गों की आँखों में भी एक ...

मायके की इज़्ज़त पर उठे सवालों से टूटी चुप्पी, बहू की हिम्मत भरी आवाज़ जिसने रिश्तों की सच्चाई और सम्मान की लड़ाई सबके सामने रख दी

संध्या अपने कमरे में चुपचाप बैठी थी। सामने मैगज़ीन खुली थी लेकिन आँखें उसके पन्नों पर नहीं, कहीं दूर शून्य में टिकी हुई थीं। कई दिनों से उसका मन भारी था। ससुराल में रहते हुए उसने बहुत कुछ सहा था, लेकिन आज की घटना ने उसकी चुप्पी तोड़ दी थी। ...

माँ के बिना मायका अधूरा लगा, पर नीम की छाँव में मिला बचपन का सहारा आँसू, यादें और ममता का अनकहा रिश्ता

कई सालों बाद वह अपने गाँव लौटी थी। वजह भी कुछ खास थी भतीजे की शादी। वरना माँ-बाप के गुजर जाने के बाद गाँव आने का कोई खास कारण नहीं बचा था। ऐसा नहीं था कि भाई- भाभी ने बुलाया नहीं। फोन तो कई बार आए थे, पर दिल नहीं ...

मोहन ने नौकरी की और जल्दबाज़ी में शादी भी कर ली, ताकि कोई घर में छोटे आदित्य का ख़्याल रख सके।

“भैया, अगले हफ़्ते गृहप्रवेश है… रविवार को। आप सबको आना ही पड़ेगा। गाड़ी मैं भेज दूँगा।”फोन पर छोटे भाई आदित्य की उत्साहित आवाज़ गूंज रही थी। मोहन ने सहजता से पूछा—“किसी नए किराए के घर में शिफ्ट हो रहे हो क्या?” उधर से आदित्य की धीमी, पर गर्व भरी आवाज़ ...

वाह भाभी मायके घूमने का शौक था ना? सासू माँ अकेली रह गईं, और आप मज़े से निकल गईं!” दीक्षा ने ताना मारा।

साक्षी की शादी को दस साल हो चुके थे। उसने इस रिश्ते में हमेशा अपना सब कुछ लगाया था। घर की जिम्मेदारियाँ, बच्चों की परवरिश, सास की सेवा और पति की देखभाल—उसने कभी किसी काम से पीछे नहीं हटना चाहा। उसका मानना था कि शादी का मतलब सिर्फ़ एक रिश्ता ...

अर्जुन का बिज़नेस ट्रिप हमेशा मीरा के लिए सवाल छोड़ जाता। कभी मुंबई, कभी दिल्ली, कभी अचानक से ऑफिस मीटिंग।

अर्जुन और मीरा की शादी को 8 साल हो चुके थे। बाहर से देखने में यह रिश्ता परफेक्ट लगता था—दोनों की अच्छी जॉब, शहर के पॉश इलाके में घर, गाड़ियाँ, और लोगों के सामने एक आदर्श कपल की इमेज। लेकिन सच अक्सर तस्वीर से अलग होता है। अर्जुन का “बिज़नेस ...

रुचि की आँखें भर आईं। वह चाहती तो बहुत कुछ कह सकती थी, लेकिन चुप रहना ही बेहतर समझा। इतने में उसका पति अर्जुन भी ऑफिस से लौट आया।

रुचि रसोई में चुपचाप बर्तन समेट रही थी। चेहरे पर थकान और आँखों में नमी थी। तभी पीछे से उसकी ननद स्वाति आकर ताने मारते हुए बोली “वाह भाभी! मायके से तो आप लाखों की बेटी बनकर आई थीं, लेकिन यहाँ तो बस ₹100 की सौगात तक ही सीमित हैं। ...

कमला देवी उम्रदराज़ थीं। चश्मा लगाए धीमी चाल से घर का काम सँभालतीं, लेकिन उनका दिल हर रोज़ एक बोझ लेकर जीता था।

सुबह की धूप आँगन में फैल रही थी। राधा ने जल्दी-जल्दी बच्चों का टिफ़िन तैयार किया और पति मनोज के लिए नाश्ता परोसा। जैसे ही सब अपने-अपने कामों के लिए निकल गए, घर में सिर्फ़ दो लोग रह गए — राधा और उसकी सास कमला देवी। कमला देवी उम्रदराज़ थीं। ...