Story

पति सुनील का स्वभाव कुछ अलग ही था। पढ़ा-लिखा था, पर मन कहीं टिकता ही नहीं। नौकरी करता तो भी गिनती के महीनों में झगड़ा कर छोड़ देता।

गाँव के उस छोटे से घर में अनिता का मन अब बार-बार घुटता। घर की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही थी। बाहर से देखने पर घर सामान्य-सा लगता, लेकिन भीतर की हालत किसी टूटी नाव जैसी थी, जो बस डूबने से रह गई थी। पड़ोसियों के लिए यह बस गपशप ...

गर्म हवा की लहरें जैसे कमरे के कोनों तक जा रही थीं। आटे की लोई बेलन के नीचे गोल-गोल घूम रही थी, और रोटी धीरे-धीरे अपना आकार ले रही थी

रसोई में तवा तप रहा था। गर्म हवा की लहरें जैसे कमरे के कोनों तक जा रही थीं। आटे की लोई बेलन के नीचे गोल-गोल घूम रही थी, और रोटी धीरे-धीरे अपना आकार ले रही थी। लड़के के माथे पर पसीने की हल्की बूंदें चमक रही थीं, लेकिन उसके चेहरे ...

बाहर कुत्तों के भौंकने की आवाज़ें आ-जा रही थीं। आसमान में चाँद बादलों से ढका हुआ था और गाँव की गलियाँ सन्नाटे में डूबी हुई थीं।

रात का दूसरा पहर था। बाहर कुत्तों के भौंकने की आवाज़ें आ-जा रही थीं। आसमान में चाँद बादलों से ढका हुआ था और गाँव की गलियाँ सन्नाटे में डूबी हुई थीं। अंदर कमरे में, गोविंद बाबू अपनी नींद से हड़बड़ाकर उठे। उम्र ने शरीर को बहुत कमजोर बना दिया था, ...

ऑफिस की घड़ी ने अभी नौ ही बजाए थे। राजीव बाबू तेज़ कदमों से अंदर आए और जैसे ही कुर्सी खींचकर बैठने लगे, रिसेप्शन का फोन लगातार बजने लगा

सुबह का समय था। ऑफिस की घड़ी ने अभी नौ ही बजाए थे। राजीव बाबू तेज़ कदमों से अंदर आए और जैसे ही कुर्सी खींचकर बैठने लगे, रिसेप्शन का फोन लगातार बजने लगा। पहली घंटी पर उन्होंने ध्यान नहीं दिया, दूसरी पर माथा पकड़ लिया और तीसरी घंटी आते-आते रिसेप्शनिस्ट ...

मास्टरजी गाँव के सबसे सीधे, सबसे सच्चे और सबसे विद्वान इंसान माने जाते थे। पत्नी का साया तो सालों पहले ही उठ चुका था।

अजय अपना बैग धीरे-धीरे समेट रहा था। आँगन में पसरे सन्नाटे को जैसे हर चीज़ महसूस कर रही थी पुरानी चारपाई, कोने में रखी कुर्सी, यहाँ तक कि दीवार पर टंगी घड़ी भी जैसे ठहर-सी गई थी। कल ही तो मास्टर रघुनाथ प्रसाद की तेरहवीं का काम सम्पन्न हुआ था। ...

पिता जिसने बेटी के लिए माँ बनकर निभाया हर त्याग और साबित किया कि सच्चा मातृत्व दिल से जिया जाता है

शहर का एक बड़ा कॉलेज। दोपहर की गर्मी बहुत तेज थी। हवा में लपटें जैसी तपिश थी। कॉलेज के आँगन में एक आदमी पसीने से भीगा हुआ घास की कटाई कर रहा था। उसका नाम था रामेश्वर। वह कॉलेज का माली था। मेहनत से उसका बदन टूट रहा था, लेकिन ...

इसी भीड़ के बीच मेरी नज़र अचानक बच्चों के कोने पर पड़ी। वहां रंग-बिरंगे चित्रों वाली किताबें सजी थीं।

मैं उस दिन संयोग से किताबों की दुकान में चला गया था। हवा में पुरानी किताबों की गंध और नए पन्नों की ताज़गी घुली हुई थी। लोगों की भीड़ अपनी-अपनी पसंद की किताबें देख रही थी—कहीं मोटी मोटी प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें, कहीं उपन्यासों की कतारें। इसी भीड़ के बीच ...

बगल में गुलाब जामुन शरबत में डूबे-डूबे चमक रहे थे। और चूल्हे पर ताज़ा मटर पनीर की सब्ज़ी पक रही थी

रसोई से आती हलुए और ताज़ी पूरी की खुशबू पूरे घर में फैली हुई थी। घी में तली जा रही पूरीयों की छन-छन और इलायची से महकते उबलते दूध की खुशबू ने पूरे घर का माहौल बदल दिया था।माँ बड़ी नज़ाकत से बेसन के लड्डू तल रही थी। बगल में ...

मैं आपकी बेटी की क्लास टीचर रेखा मेम बोल रही हूँ। आज दूसरी क्लास की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग है। कृपया अपनी बेटी के साथ समय पर पहुँचिएगा।

सुबह-सुबह जब अजय ऑफिस में अपनी फाइलें टेबल पर रख ही रहा था, तभी फोन की घंटी बजी। उसने रिसीवर उठाया तो दूसरी तरफ से एक ठंडी लेकिन सख्त आवाज़ आई “नमस्ते! मैं आपकी बेटी की क्लास टीचर रेखा मेम बोल रही हूँ। आज दूसरी क्लास की पैरेंट्स-टीचर मीटिंग है। ...

लेकिन हवेली में रहते हुए नीलिमा को महसूस हुआ, यहाँ कुछ तो अजीब है। घर के लोग दिखते तो थे, पर उनकी आँखों में जैसे कोई गहरा राज़ छुपा था

रात के साढ़े बारह बजे थे। पुरानी हवेली की खिड़कियों से आती हवा डरावनी आवाज़ कर रही थी। नीलिमा पहली बार अपने ससुराल की इस हवेली में आई थी। शादी को सिर्फ़ पाँच दिन हुए थे। बाहर से देखने में हवेली शाही लगती थी, लेकिन भीतर अजीब-सी वीरानी थी। नीलिमा ...